“कांच ही बांस के बहंगीयां…” गीतों से गूंजे घाट, अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देकर व्रती महिलाओं ने मांगी परिवार की मंगलकामना
सिकन्दरपुर, बलिया। लोक आस्था के महापर्व छठ की भव्यता सोमवार की सांझ को सिकन्दरपुर नगर और आसपास के गांवों में अपने चरम पर दिखाई दी। जैसे ही सूरज ढलने लगा, वैसे ही घाटों पर श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। “कांच ही बांस के बहंगीयां, बहंगी लचकत जाय...” जैसे पारंपरिक गीतों की गूंज से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा।
सायं चार बजे से ही व्रती महिलाएं माथे पर पूजा के पकवानों से सजी बांस की दौरी लेकर घाटों की ओर निकल पड़ीं। कोई अपने पति के साथ, तो कोई पुत्र के सहारे, सिर पर टोकरी और हाथों में पूजन सामग्री लेकर “छठ मैया” के जयघोष के साथ आगे बढ़ती रहीं। घाटों पर मालपुआ, ठेकुआ, पूड़ी, हलुआ, गन्ना, नारियल, शरीफा, मौसमी, मूली, भीगा चना, सुथनी आदि से सजे दौरे भक्तिभाव का प्रतीक बने रहे।
नगर से लेकर ग्रामीण अंचल तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। कई महिलाएं मनौती मानते हुए घर से घाट तक लेट-लेटकर पहुंचीं। अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती महिलाओं ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की दीर्घायु की कामना की।
पूरे आयोजन के दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे। क्षेत्राधिकारी रजनीश कुमार, प्रभारी निरीक्षक प्रवीण सिंह तथा चौकी प्रभारी अश्वनी मिश्रा स्वयं घाटों पर चक्रमण करते रहे और व्यवस्था संभाले रहे।
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