सिकंदरपुर के शेखपुर गांव की चांदी की ताजिया: वर्ष में केवल एक दिन होते हैं दर्शन, मुहर्रम पर उमड़ती है अपार आस्था
सिकंदरपुर (बलिया)। क्षेत्र के शेखपुर गांव में स्थित ऐतिहासिक चांदी की ताजिया धार्मिक आस्था, परंपरा और गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल मानी जाती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि श्रद्धालुओं को इसके दर्शन वर्ष में केवल एक दिन, मुहर्रम के अवसर पर ही प्राप्त होते हैं। शेष पूरे वर्ष ताजिया को पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ सुरक्षित एवं ढंककर रखा जाता है।
हसन रिजवी के दरवाजे के समीप स्थित मजार परिसर में संरक्षित यह चांदी की ताजिया वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। स्थानीय लोगों के अनुसार मुहर्रम के निर्धारित दिन विशेष धार्मिक रस्मों के साथ 35 किलो की चांदी की ताजिया का अनावरण किया जाता है, जिसकी कीमत लगभग 84 लाख रुपये हैं। हर साल 100 ग्राम चांदी जोडी़ जाती.है। इसके दर्शन के लिए बलिया ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न जनपदों से हजारों की संख्या में अकीदतमंद पहुंचते हैं। सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग जाती हैं और पूरा क्षेत्र "या हुसैन" की सदाओं तथा इबादत के माहौल से गूंज उठता है।
श्रद्धालु मजार पर चादर चढ़ाकर फातिहा पढ़ते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि, अमन-चैन तथा देश की खुशहाली की दुआ करते हैं। लोगों की मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं। यही आस्था हर वर्ष दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को इस पवित्र स्थल तक खींच लाती है।
दर्शन संपन्न होने के बाद धार्मिक परंपरा के अनुसार चांदी की ताजिया को पुनः सम्मानपूर्वक ढंक दिया जाता है और अगले मुहर्रम तक किसी के लिए भी दर्शन उपलब्ध नहीं होते। इसी अनूठी परंपरा ने शेखपुर गांव को पूर्वांचल में एक विशिष्ट धार्मिक पहचान दिलाई है।
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